Lok Sabha Results: लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों में बीजेपी को अकेले केवल 240 सीटें मिली है। पूर्ण बहुमत दूर रहने में सबसे बड़ी वजह यूपी में बीजेपी की सीटें कम होना रहा। बीजेपी को यूपी में 32 सीटों का नुकसान हुआ है। बीजेपी को हुए इस नुकसान के बाद बीजेपी पर विपक्षी दल ज्यादा दबाव डाल रहे है। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने अपने एक बयान में यह तक कह दिया कि अब सीएम योगी आदित्यनाथ की कुर्सी यूपी में डोलने लगी है और अन्य राज्यों में भी बीजेपी की स्थिति खराब हो गई है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को लोकसभा चुनाव को लेकर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि जो लोग मुख्यमंत्रियों को जेल में डालते हैं, पार्टियां तोड़ते हैं, उन्हें जनता ने चुनाव में अच्छा सबक सिखाया है। इसके साथ ही भूपेश बघेल ने इस दौरान मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं।
छत्तीसगढ़ के मोहला मानपुर जिले में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि एनडीए सरकार का भले ही गठन हो रहा हो लेकिन फिर भी कार्यकर्ताओं को हर वक्त तैयार रहना चाहिए।
भूपेश बघेल ने कहा है कि देश में अगले 6 महीने से एक साल में एक बार फिर लोकसभा चुनाव हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस इस्तीफा दे रहे हैं, योगी की कुर्सी उत्तर प्रदेश में डोल रही है। भजनलाल शर्मा की स्थिति राजस्थान में बेहद खराब हो गई है।
कार्यकर्ता साथी तैयार रहें!
6 महीने- 1 साल के भीतर मध्यावधि चुनाव हो सकते हैं.
फड़नवीस इस्तीफ़ा दे रहे हैं, योगी जी की कुर्सी डोल रही है. भजनलाल शर्मा भी डगमग-डगमग कर रहे हैं.
सरकार बनी नहीं है लेकिन जदयू प्रवक्ता अग्निवीर योजना रद्द करने और जातिगत जनगणना की बात कर रहे हैं.… pic.twitter.com/ufyt6aNJL6
भूपेश बघेल ने इसके साथ ही एनडीए सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि अभी सरकार का गठन नहीं हुआ लेकिन जेडीयू के ही नेता अग्निवीर और जातिगत जनगणना के मुद्दे को उठाने लगे हैं, जो कि असल में राहुल गांधी द्वारा अपने चुनावी कैंपेन में शामिल था।
बता दें कि पीएम मोदी को एनडीए का संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शपथग्रहण के लिए कहा है। साथ ही उन्हें मनोनीत प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त भी कर दिया है।
शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा, ‘मतदाताओं ने भाजपा के अति अहंकार तथा ‘मेरी बात मानिये, नहीं तो रास्ता नापिये’ के रवैये को ‘अनुचित’ ठहराया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के लिए यह चुनौती होगी क्योंकि सरकार चलाने में उन्हें सलाह-मशविरा करने की आदत नहीं है।’
