पीएम मोदी की कैबिनेट में यूपी के 9 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें एक महिला भी हैं। इन मंत्रियों में कुछ की दिलचस्प कहानियां हैं। कभी मुलायम सिंह की सुरक्षा में तैनात रहे एसपी सिंह बघेल को मंत्री बनाया गया है। बीएल वर्मा ने बीमा एजेंट से अपना करियर शुरू क
दैनिक भास्कर आपको इन 9 चेहरों की जिंदगी से जुड़ी कहानियां बता रहा है…
एसपी सिंह बघेल : यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर थे
राजनीति में आने से पहले एसपी सिंह बघेल यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। 1989 में मुलायम सिंह यादव जब मुख्यमंत्री बने, तो उन्हें सीएम की सुरक्षा में तैनात कर दिया गया।
लंबे चौड़े शरीर और भारी-भरकम आवाज वाले एसपी की ईमानदारी और लगन मुलायम को बहुत पसंद आई।देखते ही देखते वह उनके करीबी लोगों की लिस्ट में शामिल हो गए।
1998 के यूपी विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव के कहने पर एसपी सिंह बघेल को टिकट दिया गया। मुलायम ने उन्हें जलेसर सीट से चुनाव लड़वाया और एसपी सिंह बघेल जीते। यहीं से उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
क्यों बनाया मंत्री : सत्यपाल सिंह बघेल आगरा सीट से जीतकर संसद पहुंचे हैं। उन्होंने सपा प्रत्याशी सुरेश चंद कर्दम को 2.71 लाख वोटों से हराया। वो मोदी सरकार में कानून और स्वास्थ्य राज्य मंत्री रहे हैं। एसपी सिंह बघेल दलित समुदाय से आते हैं।
कमलेश पासवान : पिता को बम से उड़ा दिया गया था
साल 1996 के दौरान यूपी में लोकसभा चुनाव की तैयारियां चल रही थीं। 25 मार्च, 1996 की रात करीब 7 बजे गोरखपुर के बांसगांव में माल्हनपार रोड पर सपा प्रत्याशी ओम प्रकाश पासवान की जनसभा थी। वह गोरखपुर की तत्कालीन मानीराम विधानसभा सीट से तीसरी बार विधायक थे।
जनसभा में ट्रॉलियों को जोड़कर मंच बनाया गया था। जनसभा को संबोधित करने के बाद ओम प्रकाश ने जैसे ही मंच से नीचे उतरने के लिए सीढ़ी पर पैर रखा, तेज धमाका हुआ। यह एक बम था जो ओम प्रकाश पर फेंका गया था। हमले में सिर धड़ से अलग होने से ओम प्रकाश पासवान की मौके पर ही मौत हो गई।
क्यों बनाया मंत्री : कमलेश पासवान गोरखपुर जिले की बांसगांव लोकसभा सीट से चौथी बार सांसद चुने गए। वह पहली बार मंत्री बने हैं। उनकी मां भी बांसगांव सीट से सांसद रह चुकी हैं। पासी जाति के पासवान दलित समुदाय से हैं। इस बार के चुनाव में भाजपा ने पासी समुदाय को 6 टिकट दिए थे। पिछली सरकार में पासी जाति के ही कौशल किशोर को मंत्री बनाया गया था। वो इस बार चुनाव हार गए हैं। ऐसे में कमलेश पासवान को मोदी कैबिनेट में जगह मिली है।
बीएल वर्मा : बीमा एजेंट बने, घर-घर जाकर बेची पॉलिसी
बदायूं के उझानी के ज्योरा पारवाला गांव के रहने वाले बीएल वर्मा ने पोस्ट ग्रेजुएट करने के बाद नौकरी खोजनी शुरू की। मगर, नौकरी नहीं मिली। इस पर वह LIC के एजेंट बन गए। इसके बाद वह साइकिल से घर-घर जाते और लोगों से बीमा पॉलिसी खरीदने को कहते। धीरे-धीरे उनका यह काम चल निकला। बीमा का कारोबार बढ़ा, तो उझानी की ही पंजाबी कॉलोनी में उन्होंने अपना घर खरीद लिया।
क्यों बनाया मंत्री : बीएल वर्मा मोदी की पिछली सरकार में सहकारिता राज्य मंत्री और उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री थे। उन्हें अमित शाह का करीबी माना जाता है। वह OBC समुदाय से आते हैं। इस बार बदायूं सीट भाजपा नहीं जीत पाई, इसके बाद भी ओबीसी समुदाय को साथ बनाए रखने के लिए वर्मा को मंत्री बनाया गया।
राजनाथ सिंह : जिसने कहा था सीएम बनोगे, उसी की जगह सीएम बने
साल 1976…यूपी की एक जेल और इमरजेंसी का दौर। दो राजनीतिक कैदी, एक हाथ पसारे, दूसरा उस पर नजर टिकाए। टिकी नजर उठी। हाथ देखने वाला बुजुर्ग बोला। तुम एक दिन बहुत बड़े नेता बनोगे। हाथ जिस जवान का था, वो बोला, कितना बड़ा गुप्ता जी?
बुजुर्ग ने कहा- यूपी के सीएम जितना बड़ा। नौजवान हंस दिया, 24 साल का था। उसकी पार्टी तीसरे चौथे नंबर पर रहती थी। सीएम बनना बहुत ज्यादा दूर की कौड़ी थी।
24 साल बाद…वो नौजवान सीएम बन गया। उसी बुजुर्ग को हटाकर, जिसने उसका हाथ देखा था। वह नौजवान राजनाथ सिंह थे और बुजुर्ग थे रामप्रकाश गुप्त, जो खुद भी सीएम बने। राजनाथ सिंह बेहद साधारण परिवार के युवक थे, किसान परिवार से नाता था।
क्यों बनाया मंत्री : राजनाथ सिंह भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। वह पिछली कैबिनेट में रक्षा मंत्री थे। मोदी की पहली सरकार में गृहमंत्री बनाए गए थे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके राजनाथ 2005 से लेकर 2009 और 2013 से 2014 तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
जयंत चौधरी : किसान परिवार में पैदा हुए, भट्टा पारसौल में किसानों के लिए लाठी खाई
जयंत चौधरी किसान परिवार में पैदा हुए थे। उन्होंने लंदन से पढ़ाई की है। भट्टा पारसौल, बाजना और टप्पल में भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों के दुरुपयोग को लेकर उन्होंने आंदोलन किया था। भट्टा पारसौल में आंदोलन के दौरान पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया था।
आंदोलनरत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग के बाद हिंसा भड़क गई। किसानों के साथ वे खुद मौके पर मौजूद थे। इस दौरान लाठीचार्ज में वे चोटिल हो गए थे। इसका परिणाम ये हुआ कि 2013 में संसद से नया भूमि अधिग्रहण कानून पास हुआ और पुराना कानून खत्म हुआ।
क्यों बनाया मंत्री : जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने लोकसभा चुनाव के ठीक पहले सपा से नाता तोड़कर भाजपा से हाथ मिला लिया था। जयंत चौधरी को सपा की मदद से राज्यसभा की सदस्यता मिली थी। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रालोद को दो सीटें बागपत और बिजनौर दी थीं। दोनों सीटों पर रालोद को जीत मिली। इस बार भाजपा के जाट चेहरा संजीव बालियान चुनाव हार गए हैं। जयंत भी जाट हैं। अब जयंत मोदी सरकार में जाट चेहरा होंगे।
कीर्तिवर्धन सिंह : पिता ने कह दिया था, तुम विधायकी नहीं जीत सकते, लोकसभा चुनाव कैसे जीतोगे
लोकसभा चुनाव से ठीक 10 दिन पहले कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया की अपने पिता और पूर्व कृषि मंत्री कुंवर आनंद सिंह से कहासुनी हो गई। पिता ने कीर्तिवर्धन सिंह से कहा था कि तुम मनकापुर विधानसभा का चुनाव हार रहे हो, तो लोकसभा का चुनाव कैसे जीतोगे? हम तुम्हारा प्रचार नहीं करेंगे। आपसी कहासुनी के बाद कीर्तिवर्धन के पिता नेपाल रहने चले गए। अभी भी वह वहीं हैं। बेटे के मंत्री बनने की खबर सुनने के बाद भी अभी घर नहीं पहुंचे।
क्यों बनाया मंत्री : गोंडा से सांसद कीर्तिवर्धन सिंह छठवीं बार गोंडा से सांसद चुने गए। इस साल लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेता पुरुषोत्तम रूपाला के एक बयान से राजपूत समुदाय में नाराजगी फैल गई थी। उत्तर प्रदेश में कई जगह राजपूतों ने भाजपा के खिलाफ वोट किया। राजपूतों की नाराजगी दूर करने के लिए कीर्तिवर्धन सिंह को मोदी कैबिनेट में जगह दी गई है।
जितिन प्रसाद : पिता की तरह खुद भी कांग्रेस से बगावत की
जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के बड़े नेता थे। जितेंद्र प्रसाद दो पूर्व प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव के सलाहकार रह चुके थे। इसके साथ ही जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी रह चुके थे। जितेंद्र प्रसाद ने भी कभी सोनिया गांधी से बगावत की थी। नवंबर, 2000 में जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया गांधी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था।
मगर, वो हार गए थे। जनवरी, 2001 में उनका निधन हो गया था। जितिन की परनानी पूर्णिमा देवी नोबेल विजेता रबिंद्रनाथ टैगोर के भाई हेमेंद्रनाथ टैगोर की बेटी थीं। जितिन ने देहरादून के दून स्कूल से पढ़ाई की। ये वही स्कूल है, जहां से राहुल गांधी ने भी पढ़ाई की थी। पिता की तरह जितिन ने भी कांग्रेस से बगावत करके भाजपा का दामन थामा था।
क्यों बनाया मंत्री : जितिन प्रसाद 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे। उन्हें योगी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें फिर मंत्रिमंडल में जगह दी गई। अभी तक वह लोक निर्माण विभाग के मंत्री हैं।
जितिन प्रसाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं। जितिन को उत्तर प्रदेश में भाजपा का ब्राह्मण चेहरा माना जाता है। वो ब्राह्मण चेतना परिषद के नाम से संगठन चलाते हैं। इस संस्था के एक्स पेज के मुताबिक, जितिन संगठन के संरक्षक हैं।
अनुप्रिया पटेल : पिता की अर्थी को कंधा दिया, फिर शुरू की राजनीति
अनुप्रिया पटेल के पिता सोनेलाल पटेल ने 1955 में अपना दल का गठन किया। सोनेलाल पटेल को बसपा संस्थापकों में से एक भी माना जाता है। लेकिन मायावती से मतभेद के चलते उन्होंने बसपा से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद उन्होंने पार्टी बनाई।
पिता के रहते अनुप्रिया पटेल पार्टी में सक्रिय नहीं रहीं। लेकिन, सोनेलाल की 2009 में एक हादसे में मौत के बाद वह पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव बन गईं। उनकी तीन और बहनें भी हैं। चारों बहनें तब भी चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने सोनेलाल पटेल की अर्थी को कंधा दिया था।
क्यों बनाया मंत्री : अनुप्रिया पटेल अपना दल (एस) की अध्यक्ष हैं। उनकी पार्टी 2014 से भाजपा के साथ है। उन्होंने मिर्जापुर से जीत की हैट्रिक लगाई है। वो मोदी की दोनों सरकारों में मंत्री रह चुकी हैं। इस बार उनकी पार्टी एक ही सीट जीत सकी है।
पंकज चौधरी : पिता चाहते थे बिजनेस करें, वह सियासत में उतरे
पंकज चौधरी का जन्म एक बिजनेसमैन परिवार में हुआ था। पिता चाहते थे, वह बिजनेस में उतरें, लेकिन उनका मन शुरू से राजनीति की तरफ था। उन्होंने राजनीति की शुरुआत 1990 में गोरखपुर नगर निगम चुनाव से की। उप महापौर भी रह चुके हैं।
साल 1991 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर महाराजगंज से लोकसभा चुनाव जीता। 35 साल की राजनीति में वह 30 साल तक सांसद हैं। राजनीति में सफलता पाने के बाद उन्होंने पारिवारिक बिजनेस भी संभाला। परिवार में ठंडे आयुर्वेदिक तेल का व्यापार को ब्रांड में बदला। आज ‘तेल राहत रूह’ के नाम से उनका कारोबार है।
क्यों बनाया मंत्री : पंकज चौधरी भाजपा के वरिष्ठ सांसदों में से एक हैं। वो महाराजगंज सीट से 7 बार सांसद चुने गए हैं। अब तक केवल एक बार 2009 में ही हारे थे। वो मोदी की पिछली सरकार में वित्त राज्य मंत्री के पद पर थे। पंकज की कुर्मी जाति पर मजबूत पकड़ है। इसी के चलते उन्हें फिर से मंत्री बनाया गया है।
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मोदी मंत्रिमंडल में यूपी के 10 चेहरे हैं। इनमें 9 चेहरे यूपी के हैं। एक मंत्री हरदीप पुरी पंजाब के हैं, लेकिन राज्यसभा सांसद यूपी से हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मंत्रिमंडल के जरिए यूपी के क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है। यूपी में 2019 में NDA के 64 सांसद थे। इस बार यह संख्या करीब आधा घटकर 36 पर पहुंच गई, लेकिन मंत्रियों की संख्या 8% बढ़ गई। सबसे ज्यादा 4 मंत्री पश्चिम यूपी से हैं। पूर्वांचल से 3 और अवध यानी सेंट्रल यूपी से 2 मंत्रियों को जगह मिली।
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