छत्तीसगढ़ में विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस कारणों की समीक्षा करेगी। पार्टी लोकसभा की 11 में से केवल 1 सीट ही कांग्रेस जीत पाई है। 6 महीने के भीतर कांग्रेस की ये दूसरी बड़ी हार है। पूर्व सीएम और दो पूर्व मंत्री तक चुनाव हार गए।
प्रदेश में इस समय कांग्रेस के 35 विधायक हैं। इनमें से 15 विधायकों का परफॉर्मेंस निराशाजनक रही। दिग्गज नेताओं की सीट पर कांग्रेस की जगह बीजेपी को लीड मिली है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पाटन सीट, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की सक्ती, देवेंद्र यादव की सीट भिलाई नगर और खरसिया से विधायक उमेश पटेल के क्षेत्र में बड़े अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी पिछड़े हैं।
बस्तर लोकसभा सीट से चुनाव हारने वाले कवासी लखमा अपनी विधायकी वाली कोंटा सीट पर खुद की लीड बनाने में नाकाम रहे। आइए आपको बताते हैं लोकसभा में कांग्रेस विधायकों की परफॉर्मेंस का रिपोर्ट कार्ड।
दुर्ग से कांग्रेस के 2 ही विधायक, दोनों लोकसभा में कैंडिडेट
दुर्ग लोकसभा सीट में आने वाली 9 विधानसभा सीटों में से केवल 2 में ही कांग्रेस के विधायक हैं। इनमें पाटन विधायक भूपेश बघेल राजनांदगांव से चुनाव लड़ रहे थे और भिलाई नगर से विधायक देवेंद्र यादव बिलासपुर सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी थे। दोनों ही अपनी लोकसभा सीटों में चुनाव लड़ने में ज्यादा व्यस्त रहे, इसलिए पार्टी के बड़े नेताओं ने दुर्ग लोकसभा में प्रचार कम ही किया।
नतीजा ये रहा कि भूपेश बघेल की सीट पाटन में 24 हजार से ज्यादा वोटों की लीड बीजेपी प्रत्याशी विजय बघेल को मिली। देवेंद्र यादव के भिलाई नगर से भी 35 हजार से ज्यादा वोटों की लीड बीजेपी को मिली है। इसी तरह दुर्ग लोकसभा से ही पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू भी आते हैं, लेकिन वे भी इस चुनाव में महासमुंद लोकसभा से पार्टी प्रत्याशी थे।
बस्तर में कांग्रेस विधायकों ने संभाला, लेकिन अपनी ही सीट पर पिछड़े लखमा
बस्तर लोकसभा में 8 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें 3 पर कांग्रेस के विधायक हैं। इसमें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे कवासी लखमा की कोंटा सीट भी है। बस्तर और बीजापुर विधानसभा सीट से लखमा को बढ़त जरूर मिली, लेकिन अपनी विधायकी वाली कोंटा सीट में खुद को लीड दिलाने में लखमा पिछड़ गए। यहां 3 हजार 7 सौ से ज्यादा वोटों की लीड बीजेपी प्रत्याशी को मिली है।
संजारी-बालोद ने बिगाड़ा कांकेर में कांग्रेस की जीत का गणित
कांकेर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी बिरेश ठाकुर को महज 1884 वोटों के अंतर से हार मिली। विधानसभा क्षेत्रवार गणित देखें तो संजारी-बालोद क्षेत्र में ही बीजेपी को 72 हजार वोटों से ज्यादा की बड़ी लीड मिली है। इसी तरह गुंडरदेही में भी कांग्रेस की परफॉर्मेंस खराब रही है, जबकि इन दोनों सीटों पर विधायक कांग्रेस के ही हैं।
महासमुंद लोकसभा में 4 कांग्रेस विधायक, चारों जगह बीजेपी को लीड
महासमुंद लोकसभा क्षेत्र से पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू कांग्रेस प्रत्याशी थे। इस लोकसभा क्षेत्र में आने वाली 8 विधानसभा सीटों में से 4 में कांग्रेस के विधायक हैं। चारों जगह बीजेपी प्रत्याशी को ही लीड मिली है। सराईपाली, बिंद्रानवागढ़, खल्लारी और धमतरी में बीजेपी को लीड मिली। हांलाकि खल्लारी विधानसभा में ये लीड काफी कम थी।
राजनांदगांव के मोहला-मानपुर और खुज्जी में कांग्रेस को मिली लीड
राजनांदगांव लोकसभा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को 44 हजार 411 वोटों से हार मिली है। इस लोकसभा क्षेत्र की 8 में से 5 सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं, लेकिन इनमें से 2 सीटों मोहला-मानपुर और खुज्जी विधानसभा क्षेत्र में ही कांग्रेस लीड ले पाई है। जबकि पंडरिया में बीजेपी विधायक होने के बाद भी कांग्रेस को यहां से लीड मिली।
यहां कांग्रेस की जीत का गणित पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह की विधायकी वाली राजनांदगांव सीट से बिगड़ा। यहां बीजेपी प्रत्याशी संतोष पांडेय को 57 हजार 666 वोटों की लीड मिली है।
रायगढ़ लोकसभा में अपने सभी विधायकों के क्षेत्र में पिछड़ी कांग्रेस
रायगढ़ लोकसभा सीट में आने वाली 8 में से 4 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं। यहां की सभी सीटों पर बीजेपी को लीड मिली। पूर्व मंत्री उमेश पटेल खरसिया सीट से विधायक हैं। यहां भी कांग्रेस लीड नहीं ले पाई। यहां बीजेपी को सबसे ज्यादा लीड लैलूंगा सीट में मिली है।
महंत अपनी सीट में नहीं दिला पाए लीड
विधानसभा के लिहाज से जांजगीर लोकसभा कांग्रेस के लिए सबसे मजबूत सीट थी। क्योंकि इस लोकसभा की सभी 8 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं। हैरानी ये है कि इनमें से केवल 3 सीटों पर ही कांग्रेस लीड ले पाई। जबकि नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की विधायकी वाली सीट सक्ती में बीजेपी को 18 हजार से ज्यादा वोटों की लीड मिली है।
बिलासपुर में कांग्रेस विधायक वाली 2 सीटों में बीजेपी की लीड
बिलासपुर लोकसभा में 8 में से 2 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं। इनमें कोटा से अटल श्रीवास्तव और मस्तूरी से दिलीप लहरिया विधायक हैं। दोनों ही सीटों पर बीजेपी की लीड ज्यादा रही है। मस्तूरी में ये लीड 2 हजार वोटों से ज्यादा की थी, जबकि कोटा में 14 हजार वोटों से ज्यादा की लीड बीजेपी प्रत्याशी तोखन साहू को मिली।
कोरबा में कांग्रेस की अच्छी परफॉर्मेंस
छत्तीसगढ़ से एकमात्र कोरबा सीट में ही कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। यहां की 8 में से केवल 1 ही सीट में कांग्रेस विधायक है। इस सीट में कांग्रेस को लीड मिली है। बाकी 7 सीटों में बीजेपी के विधायक है, लेकिन यहां भी कांग्रेस प्रत्याशी ज्योत्सना महंत आगे रहीं। ऐसे में अब बीजेपी विधायकों की परफॉर्मेंस को लेकर जरूर सवाल खड़े होंगे।
रायपुर लोकसभा सीट में बीजेपी की सबसे बड़ी लीड
रायपुर लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी बृजमोहन अग्रवाल ने 5 लाख 75 हजार 285 वोटों के साथ प्रदेश में सबसे बड़ी जीत हासिल की है। रायपुर लोकसभा में आने वाली 9 विधानसभा सीटों में केवल 1 सीट भाटापारा में ही कांग्रेस विधायक है। यहां से बीजेपी की लीड 21400 वोटों की थी।
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