प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 50वें G7 समिट के लिए इटली में हैं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी मनुष्य को चांद तक ले जाने का साहस देती है, मगर साइबर सिक्योरिटी जैसी चुनौतियां भी पैदा करती है। हमें यह मिलकर सुनिश्चित करना होगा कि समाज के हर तबके तक इसका लाभ पहुंचे।
उन्होंने कहा कि हमें टेक्नोलॉजी के अधिकार को सर्वाधिकार में बदलना होगा। हमें इसे रचनात्मक बनाना होगा, ना कि विनाशकारी। तभी हम एक बेहतर समाज बना पाएंगे। भारत AI के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने वाले कुछ देशों में शामिल है। इसके लिए हमने A.I. मिशन भी लॉन्च किया है। इसका मूलमंत्र A.I. For All है।
PM ने शुक्रवार को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के अलावा, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के PM ऋषि सुनक और वैटिकन सिटी के प्रमुख पोप फ्रांसिस से भी मिले।
समिट में मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच भी मुलाकात हुई। दोनों नेता गले लगे। इसके बाद द्विपक्षीय बैठक हुई।
जंग शुरू होने के बाद यह दूसरा मौका है जब मोदी जेलेंस्की से मिले हैं। इससे पहले पिछले साल दोनों नेताओं ने जापान में G7 समिट में मुलाकात की थी। PM मोदी लगातार 5वीं बार G7 समिट में शामिल हुए हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनाव में हिस्सा लेने के बाद इस सम्मेलन का हिस्सा बनना बहुत संतुष्टि की बात है। मेरा सौभाग्य है कि जनता ने मुझे तीसरी बार देश का सेवा करने का अवसर दिया है। भारत में पिछले 6 दशकों के दौरान ये पहली बार हुआ है। भारत के लोगों ने जो एतिहासिक विजय के रूप में अपना आशीर्वाद दिया है, वह लोकतंत्र की जीत है।
PM मोदी ने कहा कि हमें टेक्नोलॉजी के अधिकार को सर्वाधिकार में बदलना होगा। तभी हम एक बेहतर समाज बना पाएंगे। PM ने कहा कि भारत AI के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने वाले कुछ देशों में शामिल है। इसके लिए हमने A.I. मिशन भी लॉन्च किया है। इसका मूलमंत्र A.I. For All है।
PM मोदी ने आउटरीच सेशन के अपने संबोधन में कहा कि टेक्नोलॉजी मनुष्य को चांद तक ले जाने का साहस देती है, मगर साइबर सिक्योरिटी जैसी चुनौतियां भी पैदा करती हैं। हमें यह मिलकर सुनिश्चित करना होगा कि समाज के हर तबके तक इसका लाभ पहुंचे।
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इटली में मीडिया से बातचीत में कहा कि पुतिन का ‘सीजफायर ऑफर’ एक ‘अल्टीमेटम’ है। उन्होंने कहा कि पुतिन की डिमांड पूरी भी हो गई तो भी वो यूक्रेन में जंग नहीं रोकेंगे।
G7 के आउटरीच सेशन में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने पिछले साल G20 समिट के दौरान PM मोदी की तरफ से AI को लेकर की गई पहल की सराहना की।
मेलोनी ने कहा कि इटली की अध्यक्षता में G7 समूह इस नरेटिव को कभी स्वीकार नहीं करेगा कि ‘पश्चिमी देश दुनिया के खिलाफ हैं।
PM मेलोनी ने कहा, “G7 के मुद्दों में भूमध्यसागर का क्षेत्र और अफ्रीकी कॉन्टिनेंट को भी शामिल किया गया है। हमें मिलकर इस क्षेत्र में सहयोग और समानता को बढ़ाने के लिए काम करना है।” इसके अलावा हमें क्लाइमेट चेंज जैसे बड़े मुद्दे से भी मिलकर निपटना होगा।
हमने G7 समिट के लिए अपुलिया शहर चुना क्योंकि यह शहर पश्चिमी और पूर्वी देशों के बीच डायलॉग का मंच रहा है। हम यह आउटरीच सेशन उन मु्द्दों को संबोधित करते हैं, जो इस वक्त पूरी दुनिया के लिए अहम हैं।
इनमें सबसे पहले आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आता है। यह तकनीक दुनिया में विकास के नए मौके प्रदान करती है। हालांकि, इसके कई खतरनाक चुनौतियां भी हैं।
G7 में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और इटली की PM जॉर्जिया मेलोनी के बीच बहस हो गई। दरअसल, मैक्रों ने G7 के जॉइंट स्टेटमेंट में गर्भपात के अधिकार का मुद्दा उठाने की मांग की। लेकिन मेलोनी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि मैक्रों G7 को चुनावी राजनीति का मंच न बनाएं। मेलोनी की इस बात से मैक्रों नाराज हो गए। दरअसल, फ्रांस में इसी महीने के आखिर में चुनाव हैं। मैक्रों सरकार ने मार्च में गर्भपात के अधिकार को संवैधानिक बना दिया था।
इटली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मैक्रों ने कहा कि यहां पर महिलाओं को लेकर वैसी संवेदनशीलता नहीं देखी जाती है जैसी हमारे यहां है। उन्होंने कहा कि ये बेहद बुरा है कि गर्भपात का संदर्भ हटा दिया गया।
दूसरी तरफ, जॉइंट स्टेटमेंट से गर्भपात के मुद्दे को हटाने की वजह से सोशल मीडिया पर मेलोनी को ट्रोल किया जा रहा है। कुछ यूजर्स ने कहा कि एक महिला PM को ‘महिलाओं के अधिकार’ से जुड़े मुद्दे पर अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है।
कैथोलिक चर्च के हेड और वैटिकन सिटी के प्रमुख पोप फ्रांसिस G7 समिट के लिए इटली पहुंच गए हैं। यहां PM मेलोनी ने उन्हें रिसीव किया। पोप प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात करेंगे।
रूस-यूक्रेन जंग के बीच PM मोदी ने G7 समिट के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात की है। PM मोदी ने उन्हें गले भी लगाया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई।
इस दौरान PM मोदी ने जंग पर भारत के रुख को दोहराया। उन्होंने कहा है कि किसी भी विवाद का समाधान कूटनीति और बातचीत के जरिए ही निकाला जा सकता है।
इससे पहले PM मोदी ने पिछले साल जापान में G7 समिट में जेलेंस्की से मुलाकात की थी। इस दौरान मोदी ने कहा था कि रूस-यूक्रेन जंग का समाधान बातचीत के जरिए ही सुलझाया जा सकता है।
जेलेंस्की-मोदी के बीच ब्लैक सी के एक्सपोर्ट कॉरिडोर पर चर्चा हुई। साथ ही दोनों ने खेती के क्षेत्र में नई तकनीकों को एक-दूसरे से साझा करने की संभावनाओं पर भी बात की। जेलेंस्की ने स्विटजरलैंड में होने वाले यूक्रेन पीस समिट में भारत के हाई-लेवल डेलिगेशन को भेजने के लिए PM मोदी को धन्यवाद कहा।
अमेरिकी मीडिया पोलिटिको की एक रिपोर्ट में G7 शिखर सम्मेलन में जुटे नेताओं को अब तक का ‘सबसे कमजोर जमावड़ा’ बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां जुटे अधिकांश नेता किसी घरेलू संकट से जूझ रहे हैं या फिर अगली बार चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं हैं।
अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडेन की पार्टी लगातार पिछड़ती जा रही है। चुनाव से पहले यहां पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पक्ष में माहौल बनता दिखाई दे रहा है। हालांकि वे हश मनी केस में दोषी साबित हो चुके हैं मगर उनके चाहने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है।
जर्मनी में चांसलर ओलफ शोल्ज का प्रदर्शन कमजोर हुआ है। वहां पर दक्षिणपंथी पार्टी ADF तेजी से मजबूत हो रही है। ADF ने इस बार यूरोपीय यूनियन चुनाव में 6 सीटों पर बढ़त हासिल की है। वही, चांसलर शोल्ज की पार्टी को तीसरे नंबर पर धकेल दिया है। शोल्ज की पार्टी को 2 सीटों का नुकसान हुआ है।
यूरोपीय चुनावों में बुरे प्रदर्शन के बाद फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संसद भंग कर दी है। दूसरी तरफ, ब्रिटेन में ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी की हालत बेहद खराब है और सर्वे में वह लेबर पार्टी से 20 अंकों से पीछे चल रही है। गिरती रेटिंग के बीच सुनक ने देश में चुनाव को भी प्री-पोन कर दिया है।
G7 में शामिल कनाडा के PM जस्टिन ट्रूडो और उनकी लेबर पार्टी की देश में साख लगातार कमजोर होती जा रही है। कनाडा में अगले साल चुनाव होने हैं। ऐसे में ट्रूडो की वापसी मुश्किल लग रही है। एक हालिया इंटरव्यू में ट्रूडो ने ये स्वीकार किया है कि वे राजनीति से संन्यास लेने की सोच रहे थे मगर पार्टी को मंझधार में छोड़ना उन्होंने ठीक नहीं समझा।
जापान में फुमियो किशिदा की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है। उनकी अप्रूवल रेटिंग में लगातार गिरावट दिख रही है। इस बार जून में उनकी अप्रूवल रेटिंग में 2.3% की गिरावट आई है और ये 16.5% रह गई है। ये पिछले 12 साल में सत्ताधारी पार्टी LDP के किसी शीर्ष नेता की सबसे खराब स्थिति है।
PM मोदी से बैठक के दौरान सुनक ने उन्हें लोकसभा चुनाव में जीत की बधाई दी। साथ ही उन्होंने खुशी जताई की 15 जून को स्विटजरलैंड में होने वाले यूक्रेन पीस समिट में भारत हिस्सा ले रहा है।
दोनों नेताओं ने भारत-ब्रिटेन की साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
PM मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात की है। दोनों नेता G7 के बैनर तले द्विपक्षीय बैठक की। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस दौरान उन्होंने डिफेंस, न्यूक्लियर, स्पेस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और एजुकेशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। मोदी-मैक्रों ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी बात की।
ये पहली बार नहीं जब भारत को इस संगठन ने गेस्ट के तौर पर बुलाया हो। भारत सबसे पहले 2003 में इस समिट में शामिल हुआ था। इसके लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी फ्रांस गए थे।
वहीं, समिट में सबसे ज्यादा फोकस रूस पर रहने वाला है। इसके लिए जेलेंस्की भी इटली पहुंचें हैं। G7 समिट में पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को 50 बिलियन डॉलर यानी 41 लाख करोड़ रुपए का लोन देने की घोषणा की है।
ये लोन पश्चिमी देशों में जब्त किए गए 200 बिलियन डॉलर की रूसी संपत्ति से चुकाया जाएगा। ब्रिटेन ने रूस पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है, जिसमें मॉस्को के स्टॉक एक्सचेंज भी शामिल है। उसने रूस के जहाजों पर बैन लगा दिया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इस बार G7 देशों का एजेंडा रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास जंग है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ 10 साल के सिक्योरिटी एग्रीमेंट पर साइन किया है। ये एग्रीमेंट रूस के खिलाफ जंग में अहम भूमिका निभाएगा।
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इसे एतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि रूस एक ग्लोबल खतरा बन चुका है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन कई सालों से NATO में शामिल होने का प्रयास कर रहा है। ये डील इसमें एक पुल के रूप में काम करेगा।
इस डील के साथ एक खास बात है कि ये भविष्य के अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए बाध्य नहीं है। यानी अगर भविष्य में कोई और व्यक्ति अमेरिका का राष्ट्रपति बनता है तो उसके पास इस डील को रद्द करने का भी अधिकार होगा।
हालांकि जेलेंस्की ने उम्मीद जताई कि भविष्य के अमेरिकी राष्ट्रपति भी उनका साथ देंगे और ये डील जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि चीनी लीडरशिप ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे भविष्य में भी रूस को हथियार सप्लाई नहीं करेंगे।
एक तरफ जहां पश्चिमी देश रूस के खिलाफ इटली में एकजुट हो रहे हैं, वहीं रूस की न्यूक्लियर सबमरीन युद्धाभ्यास के लिए अमेरिका के पड़ोसी देश क्यूबा में हवाना हार्बर पर पहुंच चुकी है। ये जगह अमेरिका के मियामी से सिर्फ 367 किलोमीटर दूर है।
नहीं। विदेश मामलों के जानकार प्रोफेसर राजन कुमार के मुताबिक, भारत की फॉरेन पॉलिसी काफी क्लियर है। भारत की पॉलिसी हमेशा मल्टी एलाइन्मेंट की रही है, यानी भारत ने कभी भी किसी एक गुट का समर्थन नहीं किया है।
पश्चिमी देशों के साथ भी भारत का सहयोग है। भारत के पश्चिमी देशों के साथ इकोनॉमिक संबंध अच्छे हैं। ये देश भी भारत की तरह लोकतांत्रिक हैं।
वहीं, भारत के ज्यादातर स्किल्ड वर्कर काम और पढ़ाई के लिए अमेरिका जाते हैं। इसके बावजूद भारत अमेरिका के दबाव में नहीं आता है।
इसके अलावा भारत सैंक्शन यानी दूसरे देशों पर पाबंदियां लगाने की अमेरिका और पश्चिमी देशों की पॉलिसी में भी शामिल नहीं होता है।
1975 में बना ये संगठन दुनिया के सबसे अमीर देशों का समूह है। इसमें अमेरिका, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और कनाडा शामिल हैं। ये देश हर साल एक समिट में दुनिया के अहम मुद्दों पर चर्चा करते हैं। पिछली बार G7 समिट जापान में हुआ था।
इसमें चीन के कर्ज जाल और इंडो-पैसिफिक में बढ़ते दबदबे पर चर्चा की गई थी। भारत अब तक 11 बार इस समिट में शामिल हो चुका है। सबसे पहले 2003 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को इस समिट के लिए फ्रांस ने बुलाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 से लगातार इस समिट की बैठकों में शामिल हो रहे हैं।
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