भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने 1 अप्रैल को अपना 90वां स्थापना दिवस मनाया. इस उपलक्ष्य में मुंबई में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) भी RBI के इस कार्यक्रम में शामिल हुए. इस मौके पर PM मोदी ने कहा कि एक संस्थान के रूप में RBI आजादी के पहले और आजादी के बाद का गवाह है. बता दें कि RBI की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को हुई थी. PM मोदी ने RBI के 90वें स्थापना दिवस पर अपने संबोधन के दौरान बैंकिंग सेक्टर में हुई उपलब्धियां गिनाईं.
बैंकिंग सिस्टम में हुए बदलावों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,
“आज भारत के बैंकिंग सिस्टम को एक मजबूत और टिकाऊ बैंकिंग सिस्टम माना जा रहा है. जो सिस्टम कभी डूबने की कगार पर था, वो बैंकिंग सिस्टम अब प्रॉफिट में आ गया है. और क्रेडिट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. पिछले दस सालों में ये बदलाव इसलिए आया क्योंकि हमारी नीति, नीयत और निर्णय में स्पष्टता थी. हमने कोई भी सिरा ऐसे ही नहीं छोड़ा. हमारी सरकार ने रिकग्निशन, रिज़ॉल्यूशन और रिकैपिटलाइजेशन की रणनीति पर काम किया. पब्लिक सेक्टर की बैंकों की हालात सुधारने के लिए सरकार ने करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए का कैपिटल इन्फ्यूजन किया. और साथ ही गवर्नेंस संबंधी कई बदलाव किए. इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी के कोड से करीब सवा तीन लाख करोड़ रुपए के लोन रिजॉल्व हुए हैं.”
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PM मोदी ने बैंकों के ग्रॉस NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) पर भी बात की. बता दें कि अगर किसी बैंक लोन की किस्त 90 दिनों तक यानी करीब तीन महीने तक नहीं चुकाई जाती है, तो उस लोन को NPA घोषित कर दिया जाता है. मतलब एक तरह से बैंक अपने ऐसे कर्जों को लगभग डूबा मान लेते हैं. NPA बढ़ना किसी बैंक की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए अच्छा नहीं माना जाता.
PM मोदी ने कहा,
“साल 2018 में बैंकों का जो ग्रॉस NPA 11 प्रतिशत था. वो साल 2020 में घटकर 3 प्रतिशत ही रह गया. आज तीन बैलेंस शीट की समस्या अतीत का हिस्सा भर है. बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ 15 प्रतिशत तक है.”
जनधन खातों को लेकर भी प्रधानमंत्री ने बात की. उन्होंने कहा,
“पिछले दस सालों में हमने सेंट्रल बैंक, बैंकिंग सिस्टम और अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के बीच कनेक्ट को हाईलाइट किया है. गरीबों का फाइनेंशियल इन्क्लूजन आज इसका बहुत बड़ा उदाहरण है. आज देश में 52 करोड़ जनधन खाते हैं. इनमें भी 55 प्रतिशत से ज्यादा खाते महिलाओं के नाम पर हैं. इसका प्रभाव कृषि क्षेत्र में भी देखने मिलता है.”
इन्फ्लेशन (महंगाई) टार्गेटिंग को लेकर बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,
“हमारी सरकार ने RBI को इन्फ्लेशन टार्गेटिंग का अधिकार दिया. मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने इस मैंडेट पर अच्छे से काम किया. साथ ही सरकार ने एक्टिव प्राइज मॉनिटरिंग और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए. कोरोना संकट हो, अलग-अलग देशों में युद्ध की स्थिति हो, तनाव हो, लेकिन भारत में इन्फ्लेशन मॉडरेट स्तर पर ही रहा. हमने कोरोना के दौरान आर्थिक स्थिति की चिंता भी की और सामान्य नागरिक के जीवन को भी प्राथमिकता दी. यही वजह है कि भारत के नागरिक इस आपदा से उबर कर अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं.”
इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) पर पीएम मोदी ने कहा,
“UPI को दुनियाभर में पहचान मिल चुकी है. इस पर हर महीने 1200 करोड़ से ज्यादा लेन-देन हो रहे हैं. अभी आप लोग सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी पर भी काम कर रहे हैं. हमें मिलकर आने वाले दस सालों में डिजिटल ट्रांजेक्शन की संभावनाओं को विस्तार देना होगा."
इसके साथ ही PM ने कहा कि कैशलेस इकोनॉमी से आ रहे बदलावों पर भी नज़र रखनी होगी. उन्होंने कहा कि लोगों की बैंकिंग जरूरत भी अलग-अलग हो सकती है. कई लोगों को फिजिकल बैंकिंग तो कई लोगों को डिजिटल बैकिंग पसंद होती है, देश को ऐसी नीतियां बनाने की जरूरत है जिससे सभी को सुविधा हो.
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