Pratapgarh Lok Sabha Election 2024: हर बार बदले हैं राजनीतिक समीकरण, ऐसे रहे चुनावी नतीजे; इस बार 25.. – दैनिक जागरण (Dainik Jagran)

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Pratapgarh Lok Sabha Election 2024 लोकसभा तुनाव की तारीखों का एलान हो गया है। देश में सात चरणों में लोकसभा चुनाव होंगे। उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां सात चरणों में मतदान होंगे। प्रतापगढ़ लोकसभा सीट पर छठवें चरण में 25 मई को मतदान होंगे। बता दें कि 4 जून को लोकसभा चुनाव के परिणामों का ऐलान होगा। यहां पढ़ें प्रतापगढ़ का चुनावी इतिहास…
जागरण संवाददाता, प्रतापगढ़। राजा-रजवाड़ों की धरती प्रतापगढ़ में जब-जब लोकसभा के चुनाव हुए तो दूसरे देश की नजरें यहां पर टिक रहीं। 17 बार के लोकसभा चुनाव के परिणामों ने सभी को चौंकाया। यहां की जनता ने सभी दलों को सेवा करने और विकास करने का मौका दिया। जिस उत्साह से प्रत्याशियों ने जनसंपर्क किया, उसी जोश से जनता ने उन्हें जिता कर देश की सर्वोच्च पंचायत में भेजा। कांग्रेस, भाजपा, सपा, जनसंघ, जनता पार्टी, अपना दल (एस) के प्रत्याशियों के सिर पर ताज रखा गया। इस बार का चुनाव भी रोमांचक होने वाला है।

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पूरे देश में चुनावी पारा चढ़ने के साथ ही प्रतापगढ़ में होली से पहले यहां का माहौल भी बदल गया है। सभी दल मतदाताओं के बीच अपनी बैठ बढ़ा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी और सपा ने आईएनडीआईए के प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतार दिया है। इसलिए यहां पर चुनावी हलचल अधिक हो रही है। प्रतापगढ़ में छठें चरण में 25 मई को मतदान होंगे।

1952 में प्रतापगढ़ में डाला गया था पहली बार वोट

प्रतापगढ़ लोकसभा सीट पर पहली बार वर्ष 1952 में वोट डाले गए थे, जिसमें कांग्रेस के प्रत्याशी पं. मुनीश्वर दत्त उपाध्याय ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1957 के चुनाव में भी पं. मुनीश्वर दत्त उपाध्याय चुनाव जीतकर दूसरी बार सांसद बने थे। 1962 के आम चुनाव में भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी अजीत प्रताप सिंह के सिर पर ताज रखा गया था। पांच वर्ष बाद 1967 के चुनाव में कांग्रेस ने फिर इस सीट पर अपना कब्जा जमा लिया था। दिनेश सिंह चुनाव जीते थे। 1971 के चुनाव में उन्हें दूसरी बार सांसद बनने का मौका जनता ने दिया था।

ऐसा रही चुनावी उठापटक

1977 में जनता पार्टी के प्रत्याशी रूपनाथ सिंह यादव, 1980 में कांग्रेस के अजीत प्रताप सिंह और 1984 में तीसरी बार दिनेश सिंह चुनाव जीते थे। 1989 में कांग्रेस प्रत्याशी दिनेश सिंह ने चौथी बार जीत हासिल करके एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया था। 1991 में चुनाव में जनता दल के प्रत्याशी अभय प्रताप सिंह ने कांग्रेस के विजय रथ को रोका। 1996 में कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमारी रत्ना सिंह ने एक बार फिर पार्टी की साख जनपद में बढ़ाई थी।

2019 तक ऐसा रहा चुनावी मैदान

अगले चुनाव यानी 1998 में भाजपा प्रत्याशी रामविलास वेदांती ने फिर कांग्रेस की लाइन को काट दिया। एक साल बाद 1999 में जब फिर लोकसभा के चुनाव हुए तो कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमारी रत्ना सिंह दूसरी बार सांसद बनीं। 2004 के लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी अक्षय प्रताप सिंह गोपाल जी, 2009 में कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमारी रत्ना सिंह और 2014 में अपना दल (एस) से कुंवर हरिवंश सिंह चुनाव जीते। 2019 में भाजपा प्रत्याशी संगम लाल गुप्ता सांसद बने।

दिनेश सिंह चार बार, रत्ना सिंह तीन बार सांसद

प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से सबसे ज्यादा बार चुनाव जीतने का रिकार्ड राजा दिनेश सिंह (1967, 1971, 1984, 1989) के नाम है। उनकी बेटी राजकुमार रत्ना सिंह तीन बार (1996, 1999,2009) और पं. मुनीश्वर दत्त उपाध्याय दो बार (1952,1957) चुनाव जीते हैं।

कांग्रेस 10 बार चुनाव जीती

प्रतापगढ़ लोकसभा सीट पर अब तक 17 बार चुनाव हुए हैं, जिसमें से 10 बार कांग्रेस को जीत मिली है। भाजपा का दो बार झंडा फहराया है। एक बार भारतीय जन संघ के उम्मीदवार को सफलता मिली है। जनता पार्टी, जनता दल, समाजवादी पार्टी और अपना दल (एस) को एक-एक बार विजयश्री हासिल हुई है। बसपा का यहां पर अभी तक खाता नहीं खुल पाया है। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक भी अपने पहले सांसद का इंतजार कर रहा है।

2009 के चुनाव से पहले हुआ परिसीमन

प्रतापगढ़ लोकसभा सीट का अंतिम परिसीमन 2003 में हुआ। 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले यह आकार में आया। इस चुनाव से पहले प्रतापगढ़ लोकसभा में सदर, गड़वारा, कुंडा, रामपुर खास और बाबागंज विधानसभा थी। पट्टी और बीरापुर (वर्तमान में रानीगंज) विधानसभा मछली शहर लोकसभा का हिस्सा थी। 2009 में प्रतापगढ़ लोकसभा में पट्टी और रानीगंज शामिल हो गए। सदर, रामपुर खास, विश्वनाथगंज, पट्टी और रानीगंज विधानसभा प्रतापगढ़ लोकसभा की हो गई। कुंडा और बाबागंज कौशांबी लोकसभा में शामिल हो गए। सदर विधानसभा में भाजपा, रानीगंज में सपा, पट्टी में सपा, विश्वनाथगंज में अपना दल (एस) और रामपुर खास विधानसभा में कांग्रेस की विधायक हैं।

स्थानीय मुद्दे

जनपद में खारे पानी की समस्या का आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। यहां पर कोई भी औद्योगिक इकाई न होने से युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ता है। आंवले की कोई बड़ी इकाई न होने से यहां के अमृत फल से भी बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन नहीं हो पा रहा है।

विकास कार्य

शहर में लगने वाले जाम की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए प्रयागराज-अयोध्या हाईवे पर 20 किलोमीटर का बाईपास निर्माणाधीन है। इसके अलावा लालगंज, मोहनगंज, पृथ्वीगंज, रानीगंज कस्बे की जाम की समस्या खत्म करने के लिए 51 किलोमीटर बाईपास बनने जा रहा है। इसका शिलान्यास हो चुका है। कोहंडौर से पृथ्वीगंज के लिए 40 किलोमीटर बाईपास भी बनने जा रहा है। कुसमी और भगवा चुंगी रेलवे फाटक पर रेलवे ओवर ब्रिज बनने वाला है। राजकीय इंजीनियरिंग कालेज इस सत्र से शुरू होने वाला है। शिवसत में ही 100 बेड का संयुक्त अस्पताल बन रहा है। इसके अलावा जनपद की अधिकांश प्रमुख सड़के चौड़ी होने के साथ सड़कों का जाल भी फैल गया है।
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