Loksabha Election 2024: कौन होते हैं स्टार प्रचारक, क्‍या मानकों पर खरी उतरती हैं अरव‍िंंद केजरीवाल की पत्‍नी सुनीता? – Jansatta

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल को आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुजरात में अपने चुनाव अभियान के लिए स्टार प्रचारक (Star Campaigner) के रूप में नियुक्त किया है। साथ ही आप ने जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आप नेता मनीष सिसोदिया और सत्येन्द्र जैन को भी गुजरात में अपने स्टार प्रचारक के रूप में नामित किया है। वहीं, बीजेपी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई शामिल हैं। आइये जानते हैं कौन होते हैं स्टार प्रचारक, पार्टियां किसे नियुक्त करती हैं स्टार प्रचारक और क्या हैं इसके लिए नियम?
स्टार प्रचारक वह शख्‍स होता है जिसे किसी राजनीतिक दल द्वारा किसी निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव लड़ने या प्रचार करने के लिए चुना जाता है। हालांकि, भारतीय कानून और चुनाव आयोग के न‍ियमों के तहत इसकी कोई विशिष्ट परिभाषा नहीं है। न ही चुनावी कानून यह निर्धारित करता है कि किसे स्टार प्रचारक बनाया जा सकता है या किसे नहीं।
स्टार प्रचारक एक लोकप्रिय शख्स होता है जिसके काफी प्रशंसक होते हैं। ये कोई भी हो सकता है, कोई बड़ा नेता, कोई फिल्म स्टार या सेलिब्रिटी या फिर कोई खिलाड़ी भी। स्टार प्रचारकों का चयन उनकी लोकप्रियता के आधार पर किया जाता है। एक मात्र आवश्यकता यह है कि इन व्यक्तियों को उस राजनीतिक दल का सदस्य होना चाहिए जो उन्हें नियुक्त करता है। पार्टियां उनकी लिस्ट निर्वाचन आयोग को भेजती हैं।
स्टार प्रचारक अपने साथ एक सेलिब्रिटी फैक्टर लाते हैं। उनमें भीड़ को अपनी ओर खींचने की क्षमता होती है जिसके चलते उन्हें देखने-सुनने के लिए रैलियों में भारी संख्या में भीड़ जुटती है। उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन चूंकि वह बीजेपी के सबसे बड़े नेता हैं इसलिए वह पार्टी के लिए समर्थन जुटाने के लिए देश भर में यात्रा करते हैं। इसी तरह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकसभा उम्मीदवार नहीं हैं लेकिन उन्हें बीजेपी में पीएम मोदी के बाद सबसे ज्यादा भीड़ खींचने वाला नेता माना जाता है। वह यूपी के अलावा कई राज्यों में बीजेपी के लिए प्रचार करते हैं।
सुनीता केजरीवाल में भले ही सेलेब्रि‍टी फैक्‍टर न हो, लेक‍िन अरव‍िंंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद उनके नाम पर ‘इमोशनल कार्ड’ खेल कर सुहानुभूत‍ि बटोरने की क्षमता और क‍िसी में नहीं हो सकती। अपने नाम के संदेश सुनीता केजरीवाल के जर‍िए प्रसार‍ित करवा कर अरव‍िंंद केजरीवाल ने इस द‍िशा में शुरुआत भी कर ही दी थी। फ‍िर, केजरीवाल सह‍ित आप के कई बड़े नेता जेल में हैं। ऐसे में आप ने सुनीता केजरीवाल को एक मजबूत व‍िकल्‍प के रूप में देखा होगा। सुनीता केजरीवाल की राजनीत‍िक एंट्री करवाने के ल‍िए भी चुनाव का यह मौका आप ने अच्‍छा समझा होगा और स्‍टार प्रचारक बनवा कर उनकी एंट्री का मजबूत आधार तैयार करने की रणनीत‍ि भी रही होगी।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RP एक्ट ) की धारा 77 राजनीतिक दल के नेताओं द्वारा किए गए खर्च से संबंधित कानून बताती है। आरपी अधिनियम में प्रावधान है कि एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (राष्ट्रीय या क्षेत्रीय पार्टियां) अधिकतम 40 स्टार प्रचारकों को नियुक्त कर सकता है जबकि एक रजिस्टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल अधिकतम 20 को नियुक्त कर सकता है। इन नामों को चुनाव की अधिसूचना की तारीख से सात दिनों के भीतर चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सूचित किया जाता है। बहु-चरणीय चुनाव की स्थिति मामले में राजनीतिक दल विभिन्न चरणों के लिए स्टार प्रचारकों की अलग-अलग लिस्ट दे सकते हैं।
आरपी अधिनियम में यह प्रावधान है कि राजनीतिक दल स्टार प्रचारकों की नियुक्ति कर सकते हैं या नियुक्ति रद्द कर सकते हैं। संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार, चुनाव आयोग सर्वोच्च प्राधिकारी है इसलिए आदर्श आचार संहिता के किसी भी गंभीर उल्लंघन के मामले में, चुनाव आयोग को किसी नेता के ‘स्टार प्रचारक’ टैग को रद्द करने के लिए कानून में संशोधन किया जा सकता है, जिससे पार्टी के उम्मीदवार अपने अभियानों के लिए मिलने वाले खर्च से भी वंचित हो जाएंगे।
स्टार प्रचारकों द्वारा प्रचार अभियान शुरू होने से कम से कम 48 घंटे पहले जिला चुनाव अधिकारियों को अनुमति के लिए अनुरोध प्रस्तुत किया जाएगा ताकि सभी संबंधित हितधारकों द्वारा समय पर सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा सकें।
आरपी अधिनियम में प्रावधान है कि किसी राजनीतिक दल के नेताओं द्वारा अपने राजनीतिक दल के प्रचार के लिए हवाई यात्रा या ट्रांसपोर्ट पर किया गया खर्च ऐसे उम्मीदवार के चुनाव खर्च का हिस्सा नहीं माना जाएगा। बड़े राज्यों में उम्मीदवारों के लिए चुनाव खर्च की सीमा प्रति लोकसभा क्षेत्र 95 लाख रुपये और छोटे राज्यों में 75 लाख रुपये है।
हालांकि, यह तभी लागू होता है जब स्टार प्रचारक पार्टी के लिए सामान्य प्रचार तक सीमित रहते हैं। अगर किसी आयोजित रैली/बैठक में स्टार प्रचारक चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के नाम पर वोट मांगता है या उनके साथ मंच साझा करता है तो रैली/बैठक का खर्च ऐसे उम्मीदवारों के चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा। अगर स्टार प्रचारक किसी भी उम्मीदवार के लिए प्रचार करते समय भोजन/आवास का खर्च वहन करता है तो इसे ऐसे उम्मीदवार के खर्च में शामिल किया जाएगा भले ही इसका भुगतान उम्मीदवार द्वारा किया गया हो। इसके अलावा अगर कोई उम्मीदवार स्टार प्रचारक के साथ यात्रा करता है तो स्टार प्रचारक के यात्रा खर्च का 50% भी उम्मीदवार को आवंटित किया जाएगा।
राजनीतिक दल जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत स्टार प्रचारकों का सारा खर्च वहन करते हैं। लेकिन स्टार प्रचारक का खर्च उम्मीदवार के खर्च से नहीं काटा जाता है। ऐसे में उम्मीदवार लोकसभा चुनावों के लिए पोल पैनल की 75 – 95 लाख की सीमा से परे अतिरिक्त खर्च कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर जब कोई प्रधानमंत्री या पूर्व प्रधानमंत्री स्टार प्रचारक होता है तो बुलेट-प्रूफ वाहनों सहित सुरक्षा पर होने वाला खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। अगर प्रधानमंत्री के साथ कोई अन्य स्टार प्रचारक हो तो सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले खर्च का 50 फीसदी हिस्सा उम्मीदवार को उठाना पड़ता है।
चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार में मर्यादा और संयम बनाए रखने की एडवाइजरी जारी की है। ऐसे किसी भी उल्लंघन के मामले में स्टार प्रचारकों को भी नोटिस दिया जा सकता है। किसी भी दल के स्टार प्रचारक अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के खिलाफ अनुचित और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के दोषी पाये जाते हैं या मतदाताओं की जाति/सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने और निराधार आरोप लगाने के मामले में उन्हें नोटिस दिया जा सकता है या उनका स्टार कैम्पेनर स्टेटस रद्द किया जा सकता है।
जनवरी 2020 में, दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए एक अभियान के दौरान, चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले भड़काऊ बयान देने के लिए भाजपा के अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा को स्टार प्रचारकों की सूची से हटाने का आदेश दिया था। नवंबर 2020 में, मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए उप-चुनाव के प्रचार के दौरान बीजेपी की एक महिला उम्मीदवार के खिलाफ अपमानजनक बयान देने के लिए कांग्रेस पार्टी के कमल नाथ का स्टार प्रचारक का दर्जा रद्द करने के चुनाव आयोग के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है।
सीएम केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल को AAP ने गुजरात में अपने चुनाव अभियान के लिए स्टार प्रचारक के रूप में नॉमिनेट किया है। इसके साथ ही जेल में बंद अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को भी पार्टी ने गुजरात में अपने स्टार प्रचारक के रूप में नामित किया है। इसके अलावा, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, दिल्ली की मंत्री आतिशी, सौरभ भारद्वाज और गोपाल राय भी स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल हैं।
वहीं, बीजेपी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई शामिल हैं। 40 नामों की इस लिस्ट में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उप मुख्यमंत्री अजित पवार और केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले का नाम भी है।
कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की सूची में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा , कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, दिग्विजय सिंह, सचिन पायलट शामिल हैं। अन्य प्रचारकों में अलका लांबा, अजय राय, सुखविंदर सिंह सुक्खू, सिद्धारमैया और रेवंत रेड्डी शामिल हैं।

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