परिवारवाद पर कैसे कुछ बोलेंगे PM मोदी? बिहार में बीजेपी ने बहा दी उल्टी गंगा – Jansatta

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बीजेपी की तरफ से लोकसभा चुनाव में एक बार फिर परिवारवाद को बड़ा मुद्दा बनाया गया है। ‘मोदी का परिवार’ नाम से कैंपेन भी शुरू कर दिया गया है, हर बीजेपी कार्यकर्ता ने अपने एक्स प्रोफाइल पर लिख दिया है- ‘मोदी का परिवार’। अब कहा जा रहा है कि ये रणनीति मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकती है, चौकीदार चोर की तरह फिर बीजेपी को एक मोमेंटम मिल सकता है। लेकिन इस बीच बिहार में बीजेपी ने उल्टी गंगा बहा दी है, जिस परिवारवाद के खिलाफ उसने बिगुल फूंका है, राज्य में उसी पर उसका भरोसा है।
असल में आरजेडी ने बीजेपी के इस ट्रेंड को सबसे पहले पकड़ा है। एक जारी बयान में आरजेडी ने कहा कि अब जब बीजेपी ने 11 परिवारवादी प्रत्याशियों को उतार दिया है, हम चाहेंगे कि अब पीएम मोदी इस मुद्दे पर जरूर बोलें। हमारे नेता लालू प्रसाद तो कह चुके हैं कि अगर वकील का बेटा वकील बन सकता है तो नेता का बेटा भी नेता बन सकता है। अब आरजेडी के इस बयान को बीजेपी की चुनावी लिस्ट से पूरा बल मिल रहा है।
चुनाव का पूरा शेड्यूल
अगर एनडीए ने कुल 11 ऐसे प्रत्याशी उतारे हैं जिनका परिवारवाद वाला कनेक्शन है, वहां पर अकेले बीजेपी की तरफ से चार को मौका दिया गया है। मधुबनी से बीजेपी ने सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के बेटे अशोक यादव को टिकट देने का काम किया है। इसी तरह पश्चिमी चंपारन से पूर्व सांसद मदन जैसवाल के बेटे संजय जैसवाल को मौका दिया गया है। इसी कड़ी में पूर्व सांसद राम नरेश सिंह के बेटे सुशील कुमार सिंह को औरंगाबाद से फिर उतार दिया गया है। इसी तरह नवाडा से सीपी ठाकुर के बेटे विवेक ठाकुर को टिकट मिला है।
अगर बीजेपी की साथी जेडीयू की बात करें तो वहां भी पूर्व मंत्री विद्यनाथ महतो के बेटे सुनील कुमार, आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद, पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा की पत्नी विजयलक्ष्मी को भी टिकट देने का काम हुआ है, यानी कि यहां भी परिवारवाद पर पूरा भरोसा दिखा है।
वैसे एनडीए के लिए परिवारवाद का सही मतलब जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने ही समझा है। पांच में से चार उम्मीदवार राजनीतिक परिवार से ही ताल्लुक रखते हैं। खुद चिराग पासवान पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के बेटे हैं। रामविलास के ही करीबी रिश्तेदार अरुण भराती को जमुई से टिकट मिला है। समस्तीपुर से इस बार सांभवी चौधरी को उतारा गया है जो पूर्व कांग्रेस मंत्री महावीर चौधरी की पोती हैं। अब ये सारे नाम बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से बड़ी सिरदर्दी बन सकते हैं। जिस धरती से परिवारवाद को लेकर पीएम मोदी ने सबसे बड़ा सियासी हमला किया, उसी धरती से एनडीए ने 40 में से 11 ऐसे प्रत्याशियों पर दांव लगाया जो खुद परिवारवाद के सियासी रोग से पीड़ित हैं।

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